मंगलवार, 31 जुलाई 2018

नियमों की अवहेलना और असुरक्षित वाहन चालन से आज़ादी


जब मैंने 94.3 My FM के Mission-72 के बारे में पढ़ा तो सोचने लगा रायपुर को किस बुरी आदत से आज़ाद होना चाहिए। मेरे ज़ेहन में सबसे पहले आया रायपुर शहर को ट्रैफिक नियमों की अवहेलना और असुरक्षित वाहन चालन की आदत से आज़ाद होना चाहिए।

देश में दुर्घटना और इससे होने वाली मौत का सबसे बड़ा कारण लापरवाहीपूर्ण वाहन चालन है। ट्रैफिक पुलिस या प्रशासन एक सीमा तक आपको रोक सकते हैं लेकिन जब तक हम जैसी आम पब्लिक प्रतिबद्धता नहीं दिखाएगी हम दुर्घटनाओं को नहीं रोक सकते।

जब भी मैं सड़क पर निकलता हूँ हर शख्स गाड़ी लिए खुद को माइकल शूमाकर या नारायण कार्तिकेयन समझकर एक दूसरे से रेस करता हुआ दिखता है; रेड सिग्नल के ग्रीन होने से पहले ही बीच चौराहे पर आ जाता है। सबसे ज़्यादा नियम तोड़ते मैंने रायपुर शहर की लड़कियों को देखा है जो सारे नियमों को धता बता कर रेड सिग्नल जंप कर जाती हैं या फिर गलत साइड से तेज़ गति से गाड़ी चलाते हुए ओवरटेक करती हैं मानो इस तरह वो महिला सशक्तिकरण की ब्राण्ड अम्बासेडर बन जाएंगी। युवा बाइक पर स्टंट करते हुए अपने आपको स्मार्ट समझते हैं जबकि उनसे बड़ा बेवकूफ कोई नहीं जो बेवजह अपनी और दूसरों की जान जोखिम डालते हैं। रेड सिग्नल पर यदि ट्रैफिक पुलिस का कर्मचारी न हो तो कोई रुकता ही नहीं जैसे कि ट्रैफिक के सुचारू संचालन के लिए उनकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं।

बहुत पहले नया रायपुर में एक दुर्घटना हुई थी जिसमें कुछ युवा सफारी कार से स्टंट करते हुए मारे गए। आखिर इस स्टंट का उद्देश्य क्या था??? कुछ नहीं, उनके लिए मुझे बहुत दुख हुआ था, उनसे ज़्यादा उनके घरवालों के लिए दुख हुआ।

एक इसी तरह की दुर्घटना मैंने अपनी आँखों से देखी थी; कुछ युवा महंगी स्पीडी बाइक पर बैठकर शंकर नगर मेन रोड पर उड़े जा रहे थे और अचानक सामने एक सायकल को देखकर हड़बड़ाकर गिर गए, इससे गाड़ी की पिछली सीट पर बैठी लड़की जिसकी उम्र 16 के आसपास रही होगी, वह सड़क पर बाइक से गिरकर छटपटाने लगी उसका क्या हुआ नहीं मालूम, अल्लाह करे वो सलामत हो। जिस सायकिल से टकराकर यह दुर्घटना हुई वह भी इन्हीं की तरह एक बच्चा चला रहा था उसकी जान बच गई लेकिन पैर में चोट आई थी। जो बाइक चला रहा था उसका कुछ न बिगड़ा। शंकर नगर की भीड़ वाली सड़क पर अनियंत्रित गति से बाइक चलाना कौन सी बहादुरी है; बहादुरी और बेवकूफ़ी में यकीकन फर्क होता है।
मैं चाहता हूँ रायपुर की सड़कों को मौत की राह बनाने की आदत से आज़ादी मिलनी चाहिए।