शुक्रवार, 26 अगस्त 2016

जॉब और कैरियर-3: आखिर कब



ज़रा इस किस्से को पढ़ें फिर आगे बढ़ें-

आपके जेह्न में अक्सर ये प्रश्न आता होगा, आखिर कब?  कैरियर निर्माण की योजना बनाने का सही समय कौन सा है? फ़िरोज़ की कहानी से आपको भी पता चल गया होगा कि कैरियर प्लानिंग अध्ययन काल से ही शुरू हो जाती है, जहाँ जागरूक विद्यार्थी सबसे पहले अपनी रूचि के अनुसार विषय चुनकर कैरियर की तैयारी शुरू कर चुके होते हैं, फिर योजना बनाकर अपने अंदर क्षमता तथा योग्यता विकसित करते हैं।
यहाँ यह कहना ज़रूरी होगा कि दोस्तों और रिश्तेदारों के ताने, कमज़ोर आर्थिक स्थिति, रिश्तेदारों द्वारा कदम-कदम पर रो़ड़े अटकाना उस पर उच्च शिक्षा सुविधाओं का अभाव; ये तमाम परिस्थितियाँ हिम्मत तोड़ने के लिए काफी हैं। इन सबके बावजूद फिरोज़ ने महज जॉब को नहीं बल्कि कैरियर को तरजीह दी। वही कैरियर जिसकी योजना उसने तभी बना ली थी जब वो 10 वीं में था इसलिए उसने अपने लक्ष्य के अनुसार विषय का चुनाव किया था।
कैरियर प्लानिंग का दूसरा समय तब आता है जब आपको नौकरी मिलती है। तब आप काम की ज़रूरतों के मुताबिक अपने अंदर क्षमता तथा योग्यता विकसित कर कैरियर प्लान कर सकते हैं।
काम शुरू करने के बाद निम्नलिखित बातों का अध्ययन(Study) तथा विश्लेषण(Analysis) करें तो आगे मुश्किल परिस्थितियों में आप बेहतर निर्णय ले पाएँ 

  1.  आप जिस कम्पनी में काम कर रहे हैं वहाँ आपके लिए क्या-क्या अवसर हैं
  2.  आप जिस क्षेत्र या उद्योग में काम कर रहे हैं वहाँ आपके लिए अवसर क्या-क्या हैं
  3.   आपके सामने परिस्थितियाँ क्या-क्या आ सकती हैं
  4.    आपके साथ बुरे से बुरा क्या हो सकता है और आप उससे कैसे निपट सकते हैं 
  5.    आप अपने आपको कैसे अपग्रेड कर सकते हैं 
   अपने बारे में आपको ही सोचना पड़ेगा कोई और नहीं सोचेगा

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