जॉब या कैरियर-1
जॉब और कैरियर, एक समान
लगने वाले दो शब्द कई-कई अर्थों में अलग होते हैं। हमें जीने के लिए पैसों की
ज़रूरत होती है और पैसा कमाने के लिए काम करना पड़ता है। जॉब और कैरियर में फर्क़
इसके बाद आता है। फार्मास्युटिकल सेल्स तथा मार्केटिंग के 14 वर्षीय सफर में मुझे
जितने भी लोग मिले उनमें से ज़्यादातर नाकाम लोग थे। मेरी बात अटपटी लग सकती है या
फार्मा से जुड़े साथियों को बुरा भी लग सकता है, लेकिन सच्चाई यही है; स्वयं को
गिनते हुए मैं जितने लोगों से मिला उनमें से किसी का लक्ष्य नहीं था कि वो सेल्स
में आए या फार्मा इंडस्ट्री में काम करे। सभी ने अध्ययन काल में कुछ और सोचकर रखा
था मगर परिस्थितियाँ उनके पक्ष में नहीं थी, उनमें अधिकांश लोगों का कहना था कि कोई
और काम नहीं मिल सकता था इसलिए यहाँ काम कर रहे हैं। इस लिहाज से ये नाकाम थे।
जिसने अपना नज़रिया यहाँ से बदला वो फिर नाकाम नहीं रहा। जॉब और कैरियर के बीच
नज़रिये में फ़र्क ज़िन्दगी में बहुत बड़ा परिवर्तन ला देता है। ये सिर्फ फार्मास्यूटिकल
इंडस्ट्री की बात नहीं है, कई ऐसी नौकरियाँ, कई ऐसे उद्योग होते हैं जहाँ लोग कोई
दूसरा विकल्प न होने पर आते हैं। इसके बाद अपनी ज़िन्दगी को बदलना खुद के ही हाथ
में होता है।
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